उत्तराखंड के आपदा विभाग में भी लाखों का घोटाला सामने आया है. इस घोटाले को उजागर करने में लगे हुए हैं भाजपा के ही एक नेता.

बीजेपी नेता का नाम है रविन्द्र जुगरान.सूबे में भ्रष्टाचार इतनी चरम पर है कि सत्ता दल के नेता अपनी ही सरकार पर सवाल खड़ा कर रहे हैं.

भाजपा नेता ने मुख्यमंत्री सहित आला अफसरों को दूसरी बार शपथ पत्र के साथ शिकायत पत्र भेजा है. शपथ पत्र में बीजेपी नेता ने आपदा प्रबंधन में हुई नियुक्ति पर गंभीर सवाल उठाये हैं.

भाजपा नेता रविन्द्र जुगरान ने आपदा विभाग में हुए घोटाले को सबूत के साथ सार्वजनिक किया है. इसके साथ ही मामले में शामिल अधिकारियों पर मुक़दमा दर्ज़ करने की मांग की है.

बीजेपी नेता ने नियुक्ति की जाँच के साथ 15 लाख वेतन की रिकवरी की मांग की है.

नियुक्ति से लेकर वेतन तक, हर जगह खेल

भाजपा नेता ने अपने शिकायत पत्र में बताया है कि आपदा प्रबंधन विभाग में एक संविदा कर्मी डा.के एन पांडेय की फ़र्ज़ी तरीके से मृत संवर्ग के स्थान पर पुनः नियुक्ति की गयी.

मंत्रिमंडल के 26 अप्रैल 2018 के निर्णय के अनुसार आपदा न्यूनीकरण एवं प्रबंधन विभाग के समस्त पदों को मृत संवर्ग का किया गया था.

मृत संवर्ग के स्थान पर पुनर्नियुक्ति कैसे की जा सकती है !

कार्मिक विभाग के शासनादेश 27 अप्रैल 2018 को दरकिनार करते हुए बिना कार्मिक विभाग के पुनर्नियुक्ति की गयी.

विभाग की मनमर्जियां नियुक्ति तक ही सीमित नहीं रही. नियुक्ति के बाद जालसाजी और ओवर राइटिंग करके पहले वेतन को 14000 रूपये प्रतिमाह बढ़ा दिया गया.

भाजपा नेता ने शिकायत में बताया कि नियम के खिलाफ पहले ही डा. के एन पांडेय को 123000 प्रति माह वेतन मिल रहा था. 14 हज़ार प्रति माह वेतन बढ़ने से वेतन 137000 प्रति माह हो गया.

पहले शपथपत्र की जाँच में भी हो गयी लीपा पोती

रविंद्र जुगरान ने कहा कि नियुक्ति विभाग मुख्यमंत्री के पास है. मुख्यमंत्री के बगैर संज्ञान के नियुक्ति कैसे हो गयी.

जुगरान ने आरोप लगया उन्होंने इस प्रकरण पर पहला शपथ पत्र तीन जुलाई को दिया था. शपथ पत्र के आरोपों को जाँच करने के लिए कोई कमेटी नहीं बनायी गई.

शपथ पत्र की जाँच अधिशासी निदेशक के पद पर तैनात संविदा कर्मी डा.पीयूष रौतेला को सौंप दी गयी. उन्होंने आरोप लगाया कि एक संविदा कर्मी को शपथपत्र की जाँच किस आधार पर दी गयी.

बीजेपी नेता ने सवाल उठाया कि पुनर्नियुक्ति में डा. रौतेला की भूमिका संदिग्ध है. अनुबंध पत्र उन्ही के हस्ताक्षर से जारी हुआ है. उन्होंने कहा कि जांच के नाम पर केवल दिखावा किया गया.

जुगरान ने यह भी चेताया है कि अगर जल्द जाँच कमेटी नहीं बैठाई गई तो हाईकोर्ट का रुख करेंगें.