देश में महिलाओं के खिलाफ अपराध प्रतिदिन बढ़ रहे हैं. महिला अपराधों में एसिड अटैक का अपराध भी शामिल है. केंद्र और राज्य सरकारें एसिड अटैक पीड़ितों के लिए समय-समय पर तमाम तरह के सहूलियत देने की बातें करती हैं, मगर इसकी जमीनी हकीकत कुछ और ही है. आपको धरातल पर कई ऐसे मामले मिलेंगें जिसमे एसिड अटैक पीड़िता दर-दर की ठोकरें खाने को मज़बूर हैं.

ताज़ा मामला देहरादून में रहने वाली एक एसिड अटैक पीड़िता रेखा का है. पीड़िता को उत्तराखंड सरकार ने नौकरी देने का आश्वासन दिया और इसी साल फरवरी महीने से नौकरी भी मिल गई.नौकरी मिलने के सात महीने बाद ही उसे नौकरी से निकाल दिया गया. नौकरी से निकाले जाने के बाद पीड़िता दर-दर भटक रही है. एसिड अटैक पीड़िता मदद के लिए लगातार राज्यमंत्री रेखा आर्य से मदद की गुहार लगा रही हैं.

13 साल पहले ससुराल में हुआ था एसिड अटैक 

रेखा की शादी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में हुई थी. रेखा पर साल 2007 में उसके ही ससुराल वालों ने एसिड फेंक दिया था. मामला होने के बाद वह अपने मायके ब्रह्मपुरी आ गयी, वो अपने बेटे को भी अपने साथ ले आयी थीं.  हरीश रावत की सरकार में मुआवजा दिए जाने की भी घोषणा की गई थी लेकिन इन्हें मुआवजा नहीं मिल पाया था. इसके बाद भाजपा के शासनकाल में इसी साल फरवरी महीने से रेखा को 181 हेल्पलाइन में नौकरी दे दी गई. अब उनसे नौकरी भी वापस ले ली गई है. रेखा कहती हैं कि वह कैसे भी करके नौकरी के सहारे अपना जीवन बसर कर रही थी, मगर अब नौकरी छिन जाने से उनके हालात और भी खराब हो गये हैं.

अपना दर्द बयां करते हुए रेखा ने बताया कि ज्वॉइनिंग के मात्र 2 महीने तक ही उन्हें तनख्वाह दी गई. इसके बाद से उन्हें कोई तनख्वाह नहीं मिली. एसिड अटैक पीड़िता रेखा ने बताया कि जब राज्यमंत्री रेखा आर्य हरिद्वार तक जाकर हंसी प्रहरी से मुलाकात कर सकती हैं तो वे उनसे क्यों नहीं मिल सकती. नौकरी देकर छीन लेना कहा का न्याय है. रेखा के सामने अब अपने बच्चे से साथ ही घर खर्च चलाने जैसी जिम्मेदारियां हैं, जिन्हें वे कैसे पूरा करेंगी ये उनकी समझ में भी नहीं आ रहा है.

पीड़ित महिलाओं को मदद की योजना , केवल दिखावा 

महिला अपराधों को देखते हुए राज्य सरकार बीते 13 अगस्त को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में कैबिनेट ने पीड़ित महिलाओं संबंधी प्रतिकार योजना को राज्य में लागू करने की मंजूरी दे दी थी. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तर्ज पर उत्तराखंड राज्य के भीतर ‘उत्तराखंड यौन अपराध एवं अपराधियों से पीड़ित महिलाओं हेतु प्रतिकार योजना 2020’ को प्रदेश में लागू कर दिया है, जिससे राज्य के भीतर यौन अपराध और अपराधियों से पीड़ित महिलाओं को आर्थिक सहयोग मिल सके. लेकिन रेखा को कोई मदद न मिलना इसकी पोल खोलती है.