हर महीने करोड़ों का कर्ज लेने के बाद भी त्रिवेंद्र सरकार की हालत खराब हो रही है. सरकार की हालत कुछ यूं खराब है कि, विकासखंड में तैनात डाटा एंट्री के ऑपरेटर का वेतन देने के लिए रुपए तक नहीं है. राज्य सरकार ने वेतन देने के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर सौ-सौ रुपए चंदा लगवाने का आदेश दिया है.

सरकार की लचर व्यवस्था को देखते हुए ग्रामीणों में काफी आक्रोश है. अधिकारियों ने दिया ज्ञान देते हुए कहा कि, “कंटिजेंसी मद में पहले से ही इस तरह की व्यवस्था है. ऐसे खर्च प्रशासनिक मद किए जा सकते हैं.”

सवाल ये उठता है कि हर ग्राम स्तर पर ग्राम रक्षकों की भर्ती का दावा करने वाली सरकार क्या इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए अलग से कर्मचारियों की भर्ती नहीं कर सकती है?
राज्य में इस बात की चर्चा अब जोरों पर है कि क्या अब त्रिवेंद्र सरकार इतनी कंगाल हो चुकी है कि विकासखंड स्तर पर टाइपिंग के लिए कर्मचारियों की तैनाती नहीं कर पा रही है.
डाटा एंट्री ऑपरेटर को ई ग्राम राजस्व अभियान में ऑनलाइन डाटा फीडिंग और कोरोना की रिपोर्टिंग भी करनी पड़ती है. लेकिन, विकासखंड स्तर पर इस तरह के काम के लिए सहायक भी उपलब्ध नहीं है. जिसकी वजह से काम हाथ से लिखकर किया जा रहा है और बाजार से कराया जा रहा है. जिससे सूचनाओं को भेजने में जरूरत से ज्यादा समय बर्बाद होता है.

ग्राम पंचायतों द्वारा पंचायत सॉफ्टवेयर में भी किसी कंप्यूटर सहायक और डाटा एंट्री ऑपरेटर नहीं होने से कई परेशानियां सामने खड़ी हो रही हैं. जिला पंचायत राज अधिकारी राकेश शर्मा ने भी इस बात को स्वीकर किया है.
अब एक पत्र जारी करते हुए सभी ग्राम प्रधानों को मौखिक रूप से कहा गया है कि ब्लॉक स्तर पर तैनात होने वाले टाइपिस्ट का वेतन ग्राम प्रधानों के सौ-सौ रुपए चंदे से दिया जाएगा.
आप समझ सकते हैं कि प्रदेश में बेरोजगारी और आर्थिक स्थिति के हालात क्या हैं! सोचना अब जनता को है कि राज्य को खोखला करने वालों के खिलाफ आवाज बुलंद करनी है या फिर आवाज को दबाकर राज्य की बर्बादी का तमाशा देखना है.