उत्तराखंड की सरकार और सरकार के सिरमौर इस बात का अक्सर दावा करते हैं, कि उत्तराखंड में भ्रष्टाचार को लेकर ज़ीरो टॉलरेंस की नीति है.
लेकिन ये दावे अब खोखले नजर आ रहे हैं, सरकार की कथनी और करनी में अंतर स्पष्ट दिख रहा है.
मौजूदा मामला एक विधायक के लिए कारण बताओ नोटिस जारी करने से जुड़ा है जिसने सदन में टेंडर घोटाले के सन्दर्भ में सवाल पूछ लिया था.

आपको पहले पूरा मामला समझाते हैं…

उत्तराखंड के कुमाऊ मंडल की एक विधानसभा सीट है, नाम है लोहाघाट.
इस विधानसभा के विधायक हैं, पुरन सिंह फर्त्याल, अब उन्हें भाजपा के प्रदेश महामंत्री कुलदीप कुमार ने एक कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए एक सप्ताह के भीतर जवाब माँगा है.

दरअसल बीजेपी विधायक फर्त्याल ने विधानसभा सत्र के दौरान टनकपुर-जौलजीवी सड़क के टेंडर में भ्रष्टाचार का आरोप अपनी ही सरकार पर लगाकर कठघरे में खड़ा कर दिया था. दरअसल फर्त्याल ने बुधवार को विधानसभा सत्र के दौरान सदन में कार्य स्थगन प्रस्ताव की सूचना लगाकर सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया था. विधायक के इस रवैये को पार्टी अनुशासनहीनता के तौर पर देख रही है.

मुंह में राम बगल में छुरी

उत्तराखंड के माननीय मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत अक्सर इस बात का दम्भ भरते नजर आते हैं, कि भ्रष्टाचार को लेकर उनकी सरकार में जीरो टॉलरेंस की निति है.
लेकिन उनके झूठे दावों की पोल अक्सर उनके ही कारनामे खोल देते हैं. अपने विधायक द्वारा सदन में भ्रष्टाचार पर सवाल उठाने के बाद उस पर गिरी ये गाँज इस बात का पुख्ता सबूत है, कि देवभूमि में भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलना किसी गुनाह की तरह है.
इस मामले में आगे क्या होगा ये तो भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी जाने और वहां की सरकार पर इस ढोंग और आडंबर वाली सरकार के कार्यकाल में देवभूमि भगवान भरोसे ही है.