बहुजन समाज पार्टी के निलंबित सात विधायकों के बगावती सुर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से बुधवार को मिलने के बाद ही मुखर हुए थे. नामांकन के आखिरी दिन यानी 27 अक्टूबर को प्रेस वार्ता में जब अखिलेश यादव से राज्यसभा चुनाव में बीजेपी से बीएसपी को वॉक ओवर देने का सवाल दागा गया तो उन्होंने कहा था कि तीन बजे तक इंतजार कर लो. इसके बाद ही सपा ने अपने समर्थन से बजाज का निर्दलीय नामांकन करा दिया.

अंतत: प्रकाश बजाज का पर्चा तो निरस्त हो गया लेकिन उससे पहले जिस तरह से बसपा के 6 विधायक पार्टी से बगावत कर सपा के साथ दिखे, उससे अखिलेश अपने मकसद में कामयाब जरूर होते माने जा रहे हैं. वह मुस्लिम मतदाताओं में संदेश देने में सफल रहे.

बसपा मुखिया मायावती काफी पहले से ही मुस्लिम मतदाताओं को लुभाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रही हैं. साल 2017 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने बड़े पैमाने पर मुस्लिम प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारे थे. मायावती के गुरुवार के दिए गए बयान के बाद सपाई मानकर चल रहे हैं कि मुस्लिम समुदाय में अब कोई भ्रम नहीं रह जाएगा.

कई बसपा नेता हाथी से उतरकर साइकिल पर हुए सवार

सपा-बसपा की दोस्ती वर्ष 2019 में टूटने के बाद एक साल के अंदर बसपा के कई नेताओं ने साइकिल की सवारी पसंद की है. इनमें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दयाराम पाल, कैबिनेट मंत्री रहे कमलाकांत गौतम, राम प्रसाद चौधरी, इंद्रजीत सरोज, सीएल वर्मा, दाउद अहमद तथा त्रिभुवन दत्त समेत कई प्रमुख नेता हैं.

धौलाना से विधायक असलम चौधरी की पत्नी भी बीते मंगलवार को ही सपा में शामिल हुई हैं.