उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर भले ही जिले के सभी थानों में महिला हेल्प डेस्क की शुरुआत हो गयी है. बस्ती जिले में यह ड्रीम प्रोजेक्ट शनिवार को पूरी तरीके से धराशाई हो गया. कोतवाली थाना क्षेत्र के एक गांव की पीड़ित महिला स्थानीय चौकी पर सुनवाई न होने के बाद प्रार्थना पत्र लेकर कोतवाली पहुंची. कोतवाली में भी मौजूद पुलिसकर्मियों ने पीड़िता को कोतवाली के बाहर से ही लौटा दिया. ढाई घंटे तक पीड़ित महिला हेल्प डेस्क तक पहुंचने का प्रयास करती रह. महिला की किसी ने नहीं सुनी.

दरअसल, कोतवाली थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली दो महिलाओं ने पूर्व में तैनात सोनुपार चौकी के प्रभारी रहे दारोगा दीपक सिंह पर अश्लील हरकत करने का आरोप लगाया था. इसके बाद एसपी ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए दारोगा को लाइन हाजिर कर दिया. महिलाओं का आरोप है कि इससे नाराज दारोगा दीपक अब उनके ही गांव में लड़कों से अभद्रता, छेड़खानी और मारपीट करवा रहा है. आरोप है कि दारोगा के पक्ष के लोग अब उनसे बदतमीजी पर उतारू हैं.

इंस्पेक्टर पर लगा आरोप तो किसी ने नहीं सुनी !

पीड़ित महिलाओं का कहना है कि उनके साथ गांव के कुछ मनबढ़ लड़कों ने छेड़खानी और दुष्कर्म करने की कोशिश की. इतना ही नहीं जब वो इसमें नाकाम हुए तो उनके साथ मारपीट की गई. घटना के बाद मौके पर डायल 100 पहुंची और पीड़िता का मेडिकल कराया. इसके बाद दोषियों पर एफआईआर के लिए वे शनिवार को कोतवाली आईं तो उनकी किसी ने मदद नहीं की.

पीड़ित महिलाओं ने आरोप लगाया कि सरकार ने भले ही महिला हेल्प डेस्क खोल दिया हो, लेकिन जब उन्हें न्याय मिलेगा ही नहीं तो ऐसी योजना किस काम की है. पहले ही दिन वो लोग ढाई घंटे से अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए कोतवाली का चक्कर काट रही हैं