मंत्री हरक सिंह ने भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के सचिव पद से दमयंती रावत को हटाने के तरीके पर सवाल उठाया है. हरक सिंह रावत का कहना है कि दमयंती रावत को नियमों के विपरीत बोर्ड के सचिव पद से हटाया गया है. हरक सिंह रावत ने कहा कि बोर्ड के अध्यक्ष को इतनी पावर नहीं है कि वह बोर्ड के सचिव को हटा सकें. सचिव दमयंती रावत को हटाने की जो कार्रवाई हुई है, वह नियमों के खिलाफ हुई है.

हरक सिंह रावत ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान नियमावली का हवाला देते हुए साफ कहा कि ‘मुख्यमंत्री से लेकर दर्जाधारी तक के लिए एक नियमावली बनाई गई है. ऐसे में नियमों से बनाए गए अधिकारी को इस तरह कैसे हटाया जा सकता है? हरक सिंह रावत ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री से भी यह बात कही कि आप किसी को हटाने वाले कौन होते हैं?

नहीं किया जा सकता अपमानित

हरक सिंह रावत के अनुसार दमयंती रावत को नियमों के तहत तैनाती दी गयी थी. ऐसे में एक अधिकारी को अपमानित नहीं किया जा सकता. यही नहीं, बोर्ड से हटाए गए सदस्यों को भी नियम विरुद्ध हटाया गया है. हरक सिंह रावत ने बोला कि दमयंती रावत अभी बोर्ड की सचिव हैं और सभी सदस्य अभी उसी पूर्ववत स्थिति में हैं. हरक सिंह ने कहा कि सरकार की तरफ से यह कदम कार्यकर्ताओं को एडजस्ट करने के लिए किया गया है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मुलाकात के दौरान यह बात कही. 

कौन हैं दमयंती रावत?

बता दें कि दमयंती रावत मूल रूप से शिक्षा विभाग में खंड शिक्षा अधिकारी हैं. वर्ष 2012 में प्रदेश में कांग्रेस सत्ता में आई तो हरक सिंह रावत कृषि मंत्री बने. तब दमयंती रावत खंड शिक्षा अधिकारी सहसपुर में तैनात थी. वही. तत्कालीन शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने एनओसी देने से मना कर दिया था. लेकिन दमयंती रावत बेरोकटोक प्रतिनियुक्ति पर आ गई. 

यही नहीं कुछ समय बाद उनका ओहदा बढ़ाकर उन्हें कृषि विभाग में उत्तराखंड बीज एवं जैविक प्रमाणीकरण अभिकरण के निदेशक पद पर तैनात कर दिया गया. जिसके बाद साल 2016 में सत्ता के समीकरण गड़बड़ाए और मंत्री हरक सिंह रावत को अपनी विधायकी से हाथ धोना पड़ा, तो इसका असर दमयंती रावत पर भी पड़ा.