अयोध्या में राम मंदिर का रास्ता साफ तो हो गया, लेकिन इस राह में विवादित ढांचा ध्वंस मामले को लेकर सीबीआई कोर्ट के फैसले को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड हाई कोर्ट में ललकारेगी. बोर्ड की वर्किंग कमेटी ने दो दिन की बैठक के बाद ही यह निर्णय लिया गया था.

यह बैठक ऑनलाइन हुई थी जिसमें यूनिफॉर्म सिविल कोड के खतरे की उपायों पर चर्चा हुई थी. सिविल कोड से होने वाली हानि से सियासी दलों व धार्मिक संगठनों को अवगण कराया जाएगा. बोर्ड के महासचिव को समिति गठित करने के लिए प्राधिकृत किया गया है.

बैठक में अचंब और पीड़ा किया व्यक्त

मौलाना सैयद मोहम्मद राबे हसनी नदवी ने बैठक की अध्यक्षता की. उनके साथ संचालन महासचिव मौलाना मोहम्मद वली रहमानी भी मौजूद थे. बैठक में बाबरी के आरोपियों के मामले में हाईकोर्ट के निर्णय पर अचंब और पीड़ा व्यक्त किया गया था. बोर्ड ने आपसी सहमति से सीबीआई निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी.

आजादी को प्रभावित करने का आरोप

लॉ बोर्ड के कार्यालय सचिव के अनुसार बैठक में कानूनी समिति के संयोजक यूसुफ ने सबरीमाला मामले में बताया कि इसमें धार्मिक स्वतंत्रता और संविधान के अनुच्छेद-25 का दायरा सम्मिलित है. साथ ही आरोप लगाया कि इस निर्णय का असर दूसरे धर्म के लोगों और मजहबी आजादी को भी प्रभावित करेगा.