वन विभाग के आलाधिकारी ही जब जंगल उजाड़ने में लग जाएं तो पर्यावरण को कैसे महफूज़ किया जा सकता है. खनन माफियाओं के आगे वन विभाग के आला अधिकारी और प्रशासन पूरी तरह नतमस्तक है.

जिले के डीएफओ खनन माफियाओं के सामने ऐसे नतमस्तक हुए कि नंदा देवी रिज़र्व फारेस्ट तड़ागताल में जेसीबी चलाने के परमिशन दे दी है.

अब वहां जेसीबी पहुंचाने के लिए जंगलों को चीरा और उजाड़ा जा रहा है.

मामला तब सामने आया जब डीएम को दिया गया एक शिकायती पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.

पत्र में शिकायत कर्ता ने बताया कि सवेंदनशील नंदा देवी रिज़र्व फारेस्ट तड़ागताल में जहां सॉफ्ट ज़ोन में पट्टा जारी किया गया है, वहां पर जेसीबी ले जाने के लिए जंगलों को उजाड़ा जा रहा है.

और ये सब डीएफओ के परमिशन से किया जा रहा है. बताया जा रहा है कि पट्टा धारक ने जेसीबी ले जाने के लिए बा क़ायदा वन विभाग में 10 लाख रुपये जमा कराये है.

मकसद अगर रोज़गार देना तो जेसीबी से काम क्यों!

दो साल पहले साल 2018 में पट्टा धारक ने जबरन तड़ागताल में जेसीबी लेकर वनों की हरियाली को रौंद रहा था. स्थानीय जनता के विरोध के बाद वन विभाग को मज़बूरन कार्रवाई करनी पड़ी थी.

अब 10 लाख रुपये मिलने के बाद क्या वन विभाग जैव विविधता को दांव पर लगा देगा.

इस मामले पर प्रशासन भी उदासीन है. सवाल यह भी उठ रहे हैं कि जब खनन पट्टा धारक कई मानकों को पूरा नहीं करता तो उसे पट्टे का आवंटन कैसे कर दिया गया है.

प्रशासन का इस मामले पर कहना है कि रोज़गार देने के लिए पट्टे का आवंटन किया गया है. स्थानीय लोगों का कहना है कि

शिकायत कर्ता को धमका रहे एलआईयू अधिकारी

इस मामले में शिकायत करने वाले युवकों ने अब धमकी भी जा रही है. धमकी किसी अपराधी के द्वारा नहीं बल्कि एलआईयू के अधिकारी दे रहे हैं.

शिकायत कर्ता से शिकायत वापस लेने के दबाव बनाया जा रहा है.

शिकायत करने वाले युवकों का कहना है कि हम ऐसे ही अपने जंगलों,जल और प्राकृतिक संसाधनों को नष्ट नहीं होने दे सकते.

हर साल तड़ागताल में विभिन्न प्रजाति के साइबेरिया पक्षी प्रवास पर आते हैं. अगर प्रशासन नियमों की धज़्ज़ियाँ उड़ाकर जंगलों को नष्ट करेगा तो हम इसे बचाने के लिए आंदोलन करेंगे और कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाएंगे.